नागपुर : न्याय किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा है। संविधान हर नागरिक को समानता, स्वतंत्रता और न्याय का भरोसा देता है। लेकिन जब न्याय पाने के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ें, जमा-पूंजी वकीलों की फीस पर खर्च हो, परिवार की शांति भंग हो, तब सवाल उठता है कि क्या केवल न्याय.