दीपावली के अवसर पर मिट्टी के दीये, लकड़ी के खिलौने और पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पादों से बाजारों में रौनक देखने को मिल रही है। देश के कारीगर अपने पारंपरिक हुनर और कला के जरिए स्वदेशी उत्पादों को नई पहचान दे रहे हैं। स्थानीय उत्पादों की खरीदारी से कुम्हारों, शिल्पकारों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन मिलता है। 'वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत की भावना के साथ स्वदेशी उत्पादों को अपनाने का संदेश भी.