शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब परिवारों के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा दिलाने की योजना में. शासन से मई में बजट जारी होने के बावजूद अभिभावकों और निजी स्कूलों को पांच महीने से अधिक समय तक भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ा। इस दौरान अभिभावकों को बच्चों की ड्रेस, जूते-मोजे, बैग, कॉपी और किताबें अपने खर्च पर खरीदनी पड़ीं। वहीं, फीस प्रतिपूर्ति के लिए निजी स्कूल संचालक.