हिमाचल में राष्ट्रीय राजमार्गों और फोरलेन परियोजनाओं का विस्तार पर्यावरण और जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बन गया है। पहाड़ों की अंधाधुंध कटाई, मलबे के अवैज्ञानिक निस्तारण से भूस्खलन, नदियों में प्रदूषण और बांधों को खतरा पैदा हो गया है, जिस पर केंद्रीय समिति ने सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी है।