मां हसरत खुद कभी कुछ न बन सकीं। चार साल तक हर दिन डेढ़ किमी पैदल चलकर बेटियों को स्कूल छोड़ती रहीं, ताकि गांव अंगुली न उठाए। संबंधित प्रशासन और स्थानीय अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए हैं तथा नागरिकों के हित में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। आधिकारिक समीक्षा और आगामी अपडेट के बाद स्थिति और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।