उत्तर प्रदेश में कार्यरत चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य (एमओसीएच) आयुर्वेद एवं एलोपैथ विभाग के बीच झूल रहे हैं। हालत यह है कि इन्हें वर्षों से समयबद्ध उच्च वेतनमान (एसीपी) नहीं मिला है। तीसरे एसीपी के इंतजार कर 21 एमओसीएच सेवानिवृत्ति हो चुके हैं, जिसमें कई का देहांत भी हो चुका है। प्रदेश में एमओसीएच की नियुक्ति आयुर्वेद विभाग में होती है, लेकिन वे कार्य एलोपैथ विभाग में मुख्य चिकित्साधिकारी के अधीन करते हैं।