प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इस सुभाषितम् का तात्पर्य है कि व्यक्ति की आस्था उसके अंतर्निहित स्वभाव को प्रतिबिंबित करने के साथ-साथ उसके व्यक्तित्व के निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सुभाषितम् का अर्थ है कि हर व्यक्ति की श्रद्धा उसके स्वभाव के अनुरूप होती है और वह जैसी श्रद्धा रखता है उसके व्यक्तित्व का निर्माण वैसे ही हो जाता है।