जेल की दिनचर्या से बेहाल श्रद्धा बंदियों से पूछ रही रिहाई का रास्ता. जेल की दिनचर्या और बैरक का माहौल श्रद्धा के लिए मुश्किल भरा साबित हो रहा है। रात के सन्नाटे में उसकी नींद टूट रही है। मंगलवार देर रात नींद खुलने के बाद वह काफी देर तक बैठी रही। इसके बाद बैरक में टहलकर समय बिताया। बुधवार सुबह बैरक खुलने पर वह अपनी बहन के साथ टहलती नजर आई।जेल सूत्रों.