लखनऊ। विराजखंड स्थित विराजेश्वर मंदिर में श्रीराम कथा के सातवें दिन कथावाचक शंकरदास ने कहा कि तामसी आहार करने वालों को प्रभु की भक्ति नहीं मिल सकती। उन्होंने कहा कि रावण को पता था राम भगवान है। उसने जान बूझकर भगवान राम से बैर करने के लिए माता सीता का हरण किया। सीता का हरण करने से पूर्व उसने मन में माता के चरणों की वंदना की। कथा में स्मृति त्रिपाठी, माधुरी.